30 साल बाद दो-बच्चों की शर्त खत्म, सभी को मिला चुनाव लड़ने का अधिकार ?
Rajasthan सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ी लगभग तीन दशक पुरानी दो-बच्चे की अनिवार्यता को समाप्त करने का निर्णय लिया है। जिसके तहत अब दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्ति भी पंचायत और शहरी निकाय चुनाव लड़ सकेंगे। यह प्रावधान वर्ष 1995 में लागू किया गया था। इसे जनसंख्या नियंत्रण के उपाय के रूप में देखा गया था।

संशोधन विधेयक लाए जाएंगे. इस बदलाव के लिए दो संशोधन विधेयक मौजूदा बजट सत्र में विधानसभा में पेश किए जाएंगे। इसके तहत Rajasthan Panchayati Raj Act, 1994 की धारा 19 और Rajasthan Municipalities Act, 2009 की धारा 24 में संशोधन किया जाएगा। जब यह नियम लागू किया गया था, तब राज्य की प्रजनन दर 1991-94 के दौरान 3.6 थी, जो अब घटकर 2 के आसपास आ गई है। सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों में आए व्यापक बदलाव को देखते हुए यह प्रावधान अब “अप्रासंगिक” हो चुका है।
कांग्रेस का विरोध इस फैसले को लेकर विपक्षी दल Indian National Congress ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष Govind Singh Dotasra ने कहा कि सत्तारूढ़ Bharatiya Janata Party एक ओर एक विशेष समुदाय को जनसंख्या नियंत्रण की सलाह देती है, जबकि दूसरी ओर दो-बच्चे की शर्त को समाप्त कर रही है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट रुख बताने की मांग की है।
सामाजिक संगठनों की मांग हालांकि, कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने पहले से इस प्रावधान को हटाने की मांग की थी। उनका तर्क था कि दो-बच्चे की शर्त लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विपरीत और भेदभावपूर्ण है। इस नियम के कारण पहले अयोग्य घोषित किए गए कई जमीनी नेता अब दोबारा चुनाव मैदान में उतर सकेंगे।
स्थानीय निकाय चुनावों से ठीक पहले लिया गया यह निर्णय राज्य की राजनीति में व्यापक प्रभाव डाल सकता है और आने वाले समय में जनसंख्या नीति पर नई बहस को जन्म दे सकता है।






