प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की जनगणना 2027 (Census 2027) के आयोजन को मंजूरी दे दी है। इस महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय अभ्यास पर ₹11,718.24 करोड़ की लागत आएगी। यह देश की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी।
यह जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होगी—यह देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी और 1931 के बाद पहली बार व्यापक स्तर पर जाति गणना भी शामिल की जाएगी (अनुसूचित जाति/जनजाति के अतिरिक्त अन्य जातियों का भी डेटा)।
दो चरणों में होगा आयोजन
जनगणना 2027 को दो चरणों में संपन्न किया जाएगा:
चरण-I: मकान सूचीकरण एवं आवास जनगणना (अप्रैल–सितंबर 2026)
- 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच
- प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश को 30 दिनों की निर्धारित समय-सीमा
चरण-II: जनसंख्या गणना (फरवरी 2027)
- अधिकांश क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि: 1 मार्च 2027
- लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के दुर्गम/हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए: 1 अक्टूबर 2026
डिजिटल क्रांति की ओर बड़ा कदम
Census 2027 पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न होगी। डेटा संग्रहण के लिए एंड्रॉयड और iOS आधारित मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा।
मुख्य डिजिटल पहलें:
- Census Management & Monitoring System (CMMS) पोर्टल द्वारा रियल-टाइम मॉनिटरिंग
- GPS टैगिंग और ऑफलाइन डेटा कैप्चर की सुविधा
- क्लाउड आधारित अपलोड
- 15 दिनों की स्व-गणना (Self-Enumeration) सुविधा
- Houselisting Block (HLB) Creator वेब मैप एप्लीकेशन
- उन्नत साइबर सुरक्षा प्रावधान
इससे डेटा की गुणवत्ता बेहतर होगी और नीति निर्माण के लिए आवश्यक जानकारी “क्लिक ऑफ ए बटन” पर उपलब्ध होगी।
“Census-as-a-Service” (CaaS) मॉडल
नई व्यवस्था के तहत मंत्रालयों और विभागों को स्वच्छ, मशीन-पठनीय और विश्लेषण योग्य प्रारूप में डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। इससे योजनाओं के निर्माण, निगरानी और लक्षित लाभार्थी पहचान में मदद मिलेगी।
ग्राम/वार्ड स्तर तक सूचनाओं का प्रसार कस्टमाइज्ड विजुअलाइजेशन टूल्स के माध्यम से किया जाएगा।
30 लाख कार्मिकों की तैनाती, रोजगार सृजन भी
इस विशाल अभियान में लगभग 30 लाख फील्ड फंक्शनरी—जिनमें गणनाकर्मी, पर्यवेक्षक, मास्टर ट्रेनर, चार्ज अधिकारी और जिला जनगणना अधिकारी शामिल हैं—तैनात किए जाएंगे।
- गणनाकर्मी प्रायः सरकारी शिक्षक होंगे
- सभी को मानदेय प्रदान किया जाएगा
- अतिरिक्त रूप से लगभग 18,600 तकनीकी कर्मियों की नियुक्ति 550 दिनों के लिए की जाएगी
- अनुमानित 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजन
यह डिजिटल डेटा प्रबंधन और समन्वय के क्षेत्र में क्षमता निर्माण को भी बढ़ावा देगा।
विस्तारित डेटा बिंदु और सामाजिक महत्व
मकान सूचीकरण में 34 कॉलम शामिल होंगे, जिनमें नए पैरामीटर जोड़े गए हैं:
- इंटरनेट एवं स्मार्टफोन उपलब्धता
- गैस कनेक्शन का प्रकार (PNG/LPG)
- वाहन श्रेणी
- पेयजल स्रोत
- अनाज उपभोग
साथ ही, यह जनगणना भविष्य में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation) के लिए आधार बनेगी, जब संवैधानिक रोक हटेगी।
कानूनी आधार और संचालन
जनगणना का आयोजन Office of the Registrar General and Census Commissioner of India द्वारा किया जाएगा, जो गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
इसका कानूनी ढांचा Census Act, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के अंतर्गत निर्धारित है।
यह अधिसूचना 2020 की उस अधिसूचना का स्थान लेगी, जिसके तहत 2021 की जनगणना प्रस्तावित थी, जिसे कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था।
भारत में जनगणना का इतिहास
प्राचीन काल
- वैदिक साहित्य में लोगों, घरानों और पशुधन की गिनती का उल्लेख मिलता है।
- मौर्य साम्राज्य (322–185 ई.पू.) में चंद्रगुप्त मौर्य और कौटिल्य ने गाँवों, घरानों का विस्तृत रिकॉर्ड रखा।
- गुप्त साम्राज्य (320–550 ई.) में स्थानीय अधिकारियों द्वारा भूमि और आबादी का लेखा-जोखा रखा जाता था।
मध्यकाल
- अकबर (1556–1605) के शासनकाल में अइन-ए-अकबरी में हर गाँव, घराना और पेशे का विवरण दर्ज किया गया।
ब्रिटिश काल
- पहली व्यवस्थित राष्ट्रीय जनगणना 1872 में हुई।
- इसके बाद प्रत्येक दस साल पर नियमित जनगणना आयोजित की गई।
- इसने आधुनिक भारत की Census 2027 तक की परंपरा का आधार तैयार किया।
आधुनिक भारत – Census 2027
- पहली बार पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी।
- सुविधाएँ: घर-घर ऑनलाइन डेटा संग्रह, GPS टैगिंग, 15 दिन की सेल्फ-एन्यूमरेशन।
- 1931 के बाद पहली बार व्यापक जाति गणना भी शामिल होगी।
- भारत में पहली गैर-समकालिक जनगणना 1872 में आयोजित हुई थी, जबकि नियमित दशकीय जनगणना की परंपरा 1881 से शुरू हुई।
- 2011 में पिछली जनगणना संपन्न हुई थी। 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टाल दी गई थी।
राष्ट्रीय महत्व का अभ्यास
जनगणना देश में गांव, कस्बे और वार्ड स्तर तक जनसांख्यिकी, आवास स्थिति, धर्म, अनुसूचित जाति/जनजाति, भाषा, साक्षरता, शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रवासन और प्रजनन जैसे अनेक मानकों पर सूक्ष्म स्तर का डेटा उपलब्ध कराती है।
सरकार का लक्ष्य है कि 2027 की जनगणना के परिणाम सबसे कम समय में सार्वजनिक किए जाएं और नीति निर्माण के लिए अधिक पारदर्शी, सुलभ और तकनीकी रूप से उन्नत डेटा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाए।
देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक भविष्य को दिशा देने वाली यह जनगणना 2027, प्रशासनिक दक्षता और डिजिटल भारत के दृष्टिकोण को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।(






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