गधों की घटती संख्या रोकने की बड़ी पहल: अब गधे पालना हुआ आसान, सरकार देगी करोड़ों की मदद
भारत में पारंपरिक पशुधन में गधे का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। निर्माण कार्य, ग्रामीण परिवहन और कई छोटे उद्योगों में गधे लंबे समय से उपयोगी रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में गधों की संख्या तेजी से घट रही है और कई स्थानीय नस्लें विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई हैं। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने गधों की नस्ल सुधार, संरक्षण और पंजीकरण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं के तहत राज्य सरकारों, पशुपालकों और उद्यमियों को वित्तीय सहायता भी दी जाएगी।
गधों के लिए शुरू की गई प्रमुख योजनाएं
सरकार ने मुख्य रूप से तीन तरह की पहल की है, जिनका उद्देश्य गधों की बेहतर नस्ल तैयार करना, उनकी संख्या बढ़ाना और देशी नस्लों का संरक्षण करना है।
1. क्षेत्रीय प्रयोगशाला और सीमन बैंक
इस योजना के तहत गधों के लिए Regional Semen Production Laboratory और Semen Bank स्थापित किए जाएंगे। यहां श्रेष्ठ नर गधों से वीर्य संग्रह कर सुरक्षित रखा जाएगा और वैज्ञानिक तरीके से प्रजनन कराया जाएगा।
इससे देशभर में बेहतर नस्ल के गधों का उत्पादन संभव होगा और कमजोर नस्लों में सुधार आएगा।
2. न्यूक्लियस ब्रीडिंग फार्म की स्थापना
सरकार गधों की दुर्लभ और देशी नस्लों के संरक्षण के लिए न्यूक्लियस ब्रीडिंग फार्म स्थापित करेगी।
मुख्य विशेषताएं:
- चयनित श्रेष्ठ नर और मादा गधों को इन फार्मों में रखा जाएगा
- वैज्ञानिक तरीके से प्रजनन कराया जाएगा
- तैयार हुए बेहतर नस्ल के पशु पशुपालकों और उद्यमियों को उपलब्ध कराए जाएंगे
- नस्ल संरक्षण के लिए इन-सिटू (नस्ल क्षेत्र में) और एक्स-सिटू (नस्ल क्षेत्र से बाहर) कार्यक्रम चलाए जाएंगे
वित्तीय सहायता:
इस योजना के तहत राज्य सरकारों को एकमुश्त अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी। यह सहायता 100% केंद्रीय अनुदान के रूप में होगी।
3. गधों की नस्ल पंजीकरण सोसाइटी
देश में अभी तक गधों की नस्लों को सुरक्षित रखने और रिकॉर्ड रखने के लिए कोई अधिकृत सोसाइटी नहीं है। इसलिए सरकार प्रत्येक नस्ल के लिए Breed Registration Society स्थापित करेगी।
इस सोसाइटी के कार्य:
- देशी गधों की नस्लों का पंजीकरण
- पशुओं का रिकॉर्ड और ट्रेसबिलिटी बनाए रखना
- नस्ल संरक्षण से जुड़े डेटा का संकलन
- स्टड फार्म के पंजीकरण के लिए पोर्टल का संचालन
इस कार्य में राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (ICAR-NRC Equine) तकनीकी सहयोग देगा।
वित्तीय सहायता:
सरकार सोसाइटी को एकमुश्त 1 करोड़ रुपये तक की 100% सहायता देगी।
कौन कर सकता है आवेदन
इन योजनाओं के लिए मुख्य रूप से निम्न संस्थाएं पात्र हैं:
- राज्य सरकार का पशुपालन विभाग
- पशुपालन एवं डेयरी विभाग (भारत सरकार)
- राज्य स्तर की अधिकृत संस्थाएं
हालांकि इन योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों, उद्यमियों और स्टड फार्म संचालकों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा क्योंकि उन्हें बेहतर नस्ल के पशु और प्रजनन सेवाएं उपलब्ध होंगी।
योजना के लिए आवेदन कैसे करें
यदि कोई राज्य सरकार या संस्था इस योजना का लाभ लेना चाहती है तो निम्न प्रक्रिया अपनानी होगी:
1. राज्य पशुपालन विभाग से संपर्क करें
सबसे पहले संबंधित राज्य के पशुपालन विभाग को प्रस्ताव तैयार करना होगा।
2. परियोजना प्रस्ताव तैयार करें
प्रस्ताव में निम्न जानकारी शामिल होती है:
- फार्म या प्रयोगशाला का स्थान
- प्रस्तावित बुनियादी ढांचा
- अनुमानित लागत
- पशुओं की संख्या और नस्ल
3. केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजें
तैयार प्रस्ताव पशुपालन एवं डेयरी विभाग, भारत सरकार (DAHD) को भेजा जाता है।
4.तकनीकी जांच और स्वीकृति
विशेषज्ञ समिति द्वारा परियोजना की जांच की जाती है। स्वीकृति मिलने के बाद अनुदान जारी किया जाता है।
5. ऑनलाइन पंजीकरण (जहां लागू हो)
सरकार द्वारा विकसित पोर्टल पर स्टड फार्म और नस्लों का पंजीकरण कराया जाएगा।
पशुपालकों को क्या लाभ मिलेगा
इन योजनाओं से देश के गधा पालकों को कई फायदे होंगे:
- बेहतर नस्ल के गधे उपलब्ध होंगे
- पशुओं की उत्पादकता और आय बढ़ेगी
- देशी नस्लों का संरक्षण होगा
- वैज्ञानिक प्रजनन सुविधाएं मिलेंगी
- पशुपालन आधारित रोजगार के नए अवसर बनेंगे
गधों के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया तो भारत में गधों की घटती संख्या को रोका जा सकता है। साथ ही देशी नस्लों के संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी।
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सरकार का लक्ष्य है कि वैज्ञानिक प्रजनन और नस्ल पंजीकरण के माध्यम से आने वाले वर्षों में गधों की बेहतर नस्ल विकसित की जाए और पशुपालकों की आय में वृद्धि हो।







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