एग्रोफॉरेस्ट्री खेती में पेड़ और फसल एक साथ उगाए जाते हैं, जिससे मिट्टी की सेहत बनी रहती है, पानी की बचत होती है और किसान को लंबे समय तक स्थायी आय मिलती है।
मनरेगा की वन प्रिय योजना किसानों को सही पेड़-पौधे संयोजन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता देती है।
एक खेत… कई संभावनाएँ: एग्रोफॉरेस्ट्री खेती से स्थायी आय और हरियाली
ग्रामीण भारत में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब किसान केवल एक ही फसल उगाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपनी जमीन का संतुलित और बहुआयामी उपयोग करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इसका सबसे असरदार तरीका है एग्रोफॉरेस्ट्री खेती।
एग्रोफॉरेस्ट्री क्या है?
एग्रोफॉरेस्ट्री एक वैज्ञानिक कृषि पद्धति है, जिसमें पेड़ और फसल साथ-साथ उगाए जाते हैं। इसका मतलब है कि किसान अपनी जमीन पर केवल एक फसल नहीं उगाते, बल्कि पेड़, फसल और कभी-कभी पशुपालन को भी संयोजित कर सकते हैं।
इस पद्धति का मूल उद्देश्य है:
जमीन का अधिकतम और संतुलित उपयोग करना।
मिट्टी, पानी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना।
किसान को लंबे समय तक स्थायी आय देना।
एग्रोफॉरेस्ट्री के मुख्य लाभ
1. मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना
पेड़ों की जड़ें मिट्टी को ढीला और उपजाऊ बनाती हैं।
मिट्टी में नमी बनी रहती है और कटाव (soil erosion) कम होता है।
जड़ें और पत्तियाँ मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ जोड़ती हैं, जिससे भूमि की सेहत लंबे समय तक बनी रहती है।
2. पानी की बचत और संरक्षण
पेड़ों की छाया से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है।
जड़ें पानी को जमीन में रोकती हैं, जिससे सूखे के समय भी फसल सुरक्षित रहती है।
वर्षा जल संचयन (rainwater harvesting) की प्रक्रिया में मदद मिलती है।
3. स्थायी आय और आर्थिक सुरक्षा
किसान एक ही फसल पर निर्भर नहीं रहते।
फल, लकड़ी, जड़ी-बूटियाँ और सब्ज़ियाँ एक साथ पैदा होती हैं।
लंबे समय तक आय देने वाली परिसंपत्तियाँ तैयार होती हैं।
4. पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता
पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को सोखते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
पक्षियों और छोटे जीवों के लिए आवास बनता है।
प्राकृतिक परागण और कीट नियंत्रण में मदद मिलती है।
मिट्टी और जल स्रोतों की गुणवत्ता में सुधार होता है।
मनरेगा के अंतर्गत ‘वन प्रिय योजना’
Pic Courtesy: Rural Development Department, Uttar Pradesh
केंद्र और राज्य सरकारों ने ग्रामीण क्षेत्रों में एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। इनमें प्रमुख है वन प्रिय योजना, जो मनरेगा के अंतर्गत संचालित है।
इस योजना के तहत:
किसानों को सही पेड़ और फसल संयोजन का प्रशिक्षण दिया जाता है।
भूमि की गुणवत्ता सुधारने और लंबे समय तक स्थायी संपत्ति विकसित करने में मार्गदर्शन मिलता है।
किसानों को वित्तीय सहायता और बायोमास उत्पादन के अवसर भी मिलते हैं।
यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसान एक ही भूमि पर खेती, हरियाली और आय तीनों पा सकें।
एग्रोफॉरेस्ट्री शुरू करने के लिए कदम
1. भूमि और जल स्रोत का मूल्यांकन करें
मिट्टी का प्रकार, जलवायु और पानी की उपलब्धता का अध्ययन करें।
2. सही पेड़ और फसल का चयन करें
स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार फलदार, साग-सब्जी या लकड़ी वाले पेड़ लगाएँ।
फसल और पेड़ का ऐसा संयोजन करें जिससे दोनों को पर्याप्त धूप और पोषण मिले।
3. सही दूरी और संयोजन का ध्यान रखें
पेड़ और फसल के बीच उपयुक्त अंतर रखें ताकि पेड़ की छाया फसल को नुकसान न पहुँचाए।
मल और पानी का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करें।
4. नियमित देखभाल और निरीक्षण
फसल और पेड़ों को रोग और कीटों से बचाने के लिए समय-समय पर निगरानी करें।
जैविक खाद और पानी का सही उपयोग करें।
किसानों के लिए संदेश
एग्रोफॉरेस्ट्री केवल खेती का तरीका नहीं है, बल्कि भविष्य की खेती है। यह किसानों को आर्थिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की सेहत तीनों प्रदान करती है।