Drone Farming: अब खेतों के ऊपर उड़ेगा भविष्य, किसानों की खेती होगी आसान
Drone Farming — आधुनिक कृषि की नई क्रांति खेतों तक पहुंची
कुछ साल पहले तक जो नजारा सिर्फ फिल्मों या विदेशी खेतों में दिखता था, वह अब भारत के गांवों में भी आम होता जा रहा है — खेतों के ऊपर उड़ता एक ड्रोन, जो कुछ ही मिनटों में पूरे खेत में कीटनाशक और उर्वरक का छिड़काव कर देता है। यही है ड्रोन से खेती की तस्वीर, जो अब भारतीय कृषि का एक नया और तेजी से बढ़ता हुआ चेहरा बनती जा रही है।
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पारंपरिक तरीके से कितना अलग है यह तकनीक
पारंपरिक तरीके से खेत में कीटनाशक छिड़कने में किसान को घंटों मेहनत करनी पड़ती है, साथ ही जहरीले रसायनों के सीधे संपर्क में आने का खतरा भी बना रहता है। ड्रोन तकनीक इस पूरी प्रक्रिया को न सिर्फ तेज बनाती है, बल्कि किसान को रसायनों के सीधे संपर्क से भी बचाती है। एक बड़ा खेत, जिसे छिड़कने में मजदूरों को पूरा दिन लग जाता था, अब ड्रोन की मदद से कुछ ही मिनटों में कवर हो जाता है।
कहां-कहां हो रहा है ड्रोन का इस्तेमाल
खेती में ड्रोन सिर्फ छिड़काव तक सीमित नहीं है। इसके इस्तेमाल का दायरा लगातार बढ़ रहा है:
- कीटनाशक, उर्वरक और नैनो उर्वरकों का सटीक छिड़काव
- फसल की सेहत और बढ़वार की हवाई निगरानी
- बड़े रकबे में फसल क्षति का आकलन
- बीज छिड़काव और खेत का मैपिंग
सरकार क्यों दे रही है भारी सब्सिडी
केंद्र और राज्य सरकारें कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) जैसी योजनाओं के जरिए किसान ड्रोन की खरीद पर भारी सब्सिडी दे रही हैं। कई राज्यों में ड्रोन सहित कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, ताकि छोटे और सीमांत किसान भी महंगी तकनीक को अपने बजट में खरीद सकें। कृषि स्नातकों और उद्यमियों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने पर भी अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान है, ताकि वे किराए पर ड्रोन सेवा देकर अपने आसपास के किसानों तक यह तकनीक पहुंचा सकें।
महिला स्वयं सहायता समूहों को भी मिल रहा मौका
ड्रोन तकनीक अब सिर्फ बड़े किसानों तक सीमित नहीं रह गई है। सरकार की योजना है कि हजारों महिला स्वयं सहायता समूहों को भी ड्रोन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि ग्रामीण महिलाएं इस तकनीक के जरिए न सिर्फ अपने आसपास के किसानों की मदद करें, बल्कि खुद के लिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का जरिया भी बनाएं।
किन किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
- जो किसान बड़े रकबे में खेती करते हैं और समय पर छिड़काव नहीं करा पाते
- वे किसान जो मजदूरों की कमी और बढ़ती मजदूरी लागत से परेशान हैं
- कृषि स्नातक और युवा उद्यमी, जो कस्टम हायरिंग सेंटर के जरिए ड्रोन सेवा का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं
- किसान उत्पादक संगठन (FPO), जो सामूहिक रूप से तकनीक अपनाना चाहते हैं
सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें
ड्रोन खरीद पर सब्सिडी पाने के लिए किसानों को अपने राज्य के कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन और बुकिंग करनी होती है। आवेदन की अवधि हर राज्य और हर योजना के हिसाब से अलग-अलग तय की जाती है, इसलिए आवेदन की अंतिम तिथि पर नजर रखना जरूरी है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ड्रोन से खेती सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि खेती के तरीके को स्थायी रूप से बदलने वाली तकनीक बन जाएगी। जैसे-जैसे सब्सिडी का दायरा बढ़ेगा और कस्टम हायरिंग सेंटर की संख्या बढ़ेगी, छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी यह तकनीक किराए पर आसानी से उपलब्ध होती जाएगी — जिससे खेती की लागत घटेगी और उत्पादकता बढ़ेगी।
नोट: ड्रोन सब्सिडी योजना से जुड़े नियम, अनुदान राशि और आवेदन तिथि राज्य दर राज्य अलग हो सकते हैं। सटीक और ताजा जानकारी के लिए अपने राज्य के कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
— आधुनिक कृषि की नई क्रांति खेतों तक पहुंची
कुछ साल पहले तक जो नजारा सिर्फ फिल्मों या विदेशी खेतों में दिखता था, वह अब भारत के गांवों में भी आम होता जा रहा है — खेतों के ऊपर उड़ता एक ड्रोन, जो कुछ ही मिनटों में पूरे खेत में कीटनाशक और उर्वरक का छिड़काव कर देता है। यही है ड्रोन से खेती की तस्वीर, जो अब भारतीय कृषि का एक नया और तेजी से बढ़ता हुआ चेहरा बनती जा रही है।
पारंपरिक तरीके से कितना अलग है यह तकनीक
पारंपरिक तरीके से खेत में कीटनाशक छिड़कने में किसान को घंटों मेहनत करनी पड़ती है, साथ ही जहरीले रसायनों के सीधे संपर्क में आने का खतरा भी बना रहता है। ड्रोन तकनीक इस पूरी प्रक्रिया को न सिर्फ तेज बनाती है, बल्कि किसान को रसायनों के सीधे संपर्क से भी बचाती है। एक बड़ा खेत, जिसे छिड़कने में मजदूरों को पूरा दिन लग जाता था, अब ड्रोन की मदद से कुछ ही मिनटों में कवर हो जाता है।
कहां-कहां हो रहा है ड्रोन का इस्तेमाल
खेती में ड्रोन सिर्फ छिड़काव तक सीमित नहीं है। इसके इस्तेमाल का दायरा लगातार बढ़ रहा है:
- कीटनाशक, उर्वरक और नैनो उर्वरकों का सटीक छिड़काव
- फसल की सेहत और बढ़वार की हवाई निगरानी
- बड़े रकबे में फसल क्षति का आकलन
- बीज छिड़काव और खेत का मैपिंग
सरकार क्यों दे रही है भारी सब्सिडी
केंद्र और राज्य सरकारें कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) जैसी योजनाओं के जरिए किसान ड्रोन की खरीद पर भारी सब्सिडी दे रही हैं। कई राज्यों में ड्रोन सहित कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, ताकि छोटे और सीमांत किसान भी महंगी तकनीक को अपने बजट में खरीद सकें। कृषि स्नातकों और उद्यमियों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने पर भी अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान है, ताकि वे किराए पर ड्रोन सेवा देकर अपने आसपास के किसानों तक यह तकनीक पहुंचा सकें।
महिला स्वयं सहायता समूहों को भी मिल रहा मौका
ड्रोन तकनीक अब सिर्फ बड़े किसानों तक सीमित नहीं रह गई है। सरकार की योजना है कि हजारों महिला स्वयं सहायता समूहों को भी ड्रोन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि ग्रामीण महिलाएं इस तकनीक के जरिए न सिर्फ अपने आसपास के किसानों की मदद करें, बल्कि खुद के लिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का जरिया भी बनाएं।
किन किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
- जो किसान बड़े रकबे में खेती करते हैं और समय पर छिड़काव नहीं करा पाते
- वे किसान जो मजदूरों की कमी और बढ़ती मजदूरी लागत से परेशान हैं
- कृषि स्नातक और युवा उद्यमी, जो कस्टम हायरिंग सेंटर के जरिए ड्रोन सेवा का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं
- किसान उत्पादक संगठन (FPO), जो सामूहिक रूप से तकनीक अपनाना चाहते हैं
सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें
ड्रोन खरीद पर सब्सिडी पाने के लिए किसानों को अपने राज्य के कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन और बुकिंग करनी होती है। आवेदन की अवधि हर राज्य और हर योजना के हिसाब से अलग-अलग तय की जाती है, इसलिए आवेदन की अंतिम तिथि पर नजर रखना जरूरी है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ड्रोन से खेती सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि खेती के तरीके को स्थायी रूप से बदलने वाली तकनीक बन जाएगी। जैसे-जैसे सब्सिडी का दायरा बढ़ेगा और कस्टम हायरिंग सेंटर की संख्या बढ़ेगी, छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी यह तकनीक किराए पर आसानी से उपलब्ध होती जाएगी — जिससे खेती की लागत घटेगी और उत्पादकता बढ़ेगी।
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