GOBARdhan Yojana: अब गोबर और कचरे से भी होगी कमाई, जानें पूरी योजना
2018 से चल रही यह योजना पशुओं के गोबर और जैविक कचरे को बायोगैस और जैविक खाद में बदलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत दे रही है
गांवों में सदियों से पशुओं का गोबर या तो जलावन के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है, या फिर बिना किसी उपयोग के यूं ही बर्बाद हो जाता है। लेकिन अब केंद्र सरकार की GOBARdhan Yojana (गोबरधन योजना) इसी गोबर और जैविक कचरे को कमाई और स्वच्छ ऊर्जा के एक बड़े स्रोत में बदल रही है।
GOBARdhan Yojana कब शुरू हुई थी
गोबरधन ( GOBARdhan )
योजना का पूरा नाम है “Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan”, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2018 में की गई थी। इसे केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS) द्वारा नोडल विभाग के रूप में संचालित किया जाता है।
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योजना का मकसद क्या है
इस योजना का मुख्य उद्देश्य मवेशियों के गोबर, कृषि अवशेष, नगरपालिका के ठोस कचरे और सीवेज मल जैसी जैविक सामग्री को बायोगैस, संपीड़ित बायोगैस (CBG) और बायो-सीएनजी में बदलने के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। इससे न सिर्फ गांवों में स्वच्छता बेहतर होती है, बल्कि स्वच्छ ईंधन, जैविक खाद और ग्रामीण रोजगार जैसे कई फायदे भी एक साथ मिलते हैं।
गांव के लिए क्या-क्या फायदे हैं
- स्वच्छ ईंधन: बायोगैस संयंत्र से मिलने वाली गैस का इस्तेमाल खाना पकाने और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए किया जा सकता है
- जैविक खाद: संयंत्र से निकलने वाला अवशेष उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल होता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है
- अतिरिक्त आमदनी: किसान और पशुपालक गोबर बेचकर सीधी आमदनी भी कमा सकते हैं
- स्वच्छता में सुधार: गांवों में खुले में पड़े कचरे और गोबर के सही प्रबंधन से स्वच्छता की स्थिति बेहतर होती है
- रोजगार के अवसर: संयंत्रों के संचालन और रखरखाव में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है
अब तक कितना काम हो चुका है
हाल की जानकारी के मुताबिक, देशभर में अब तक 650 से ज्यादा गोबरधन संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। हालांकि संपीड़ित बायोगैस (CBG) संयंत्रों की रफ्तार अभी उतनी तेज नहीं रही, जितनी उम्मीद की गई थी — दिसंबर 2024 तक सिर्फ 115 CBG संयंत्र ही पूरी तरह कार्यात्मक हो पाए थे, जबकि सरकार का लक्ष्य 2030 तक 5,000 CBG संयंत्र स्थापित करने का है। इसे देखते हुए सरकार अब स्वीकृति प्रक्रिया को तेज करने और निवेश आकर्षित करने पर विशेष ध्यान दे रही है।
एकीकृत पंजीकरण पोर्टल — बड़ा नया कदम
योजना को और आसान और पारदर्शी बनाने के लिए हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने गोबरधन एकीकृत पंजीकरण पोर्टल लॉन्च किया है। इस पोर्टल का मकसद है कि बायोगैस और CBG क्षेत्र में व्यवसाय करना आसान बने, ताकि निजी कंपनियां भी इसमें ज्यादा निवेश करने के लिए आगे आएं। यह पोर्टल भारत के जलवायु कार्रवाई लक्ष्यों, सतत विकास लक्ष्यों (SDG) और मिशन LiFE के साथ भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
किसानों और ग्रामीणों के लिए मौका
गोबरधन योजना सिर्फ बड़े कॉर्पोरेट निवेशकों तक सीमित नहीं है। स्थानीय किसान, स्वयं सहायता समूह (SHG) और सहकारी समितियां भी छोटे स्तर पर बायोगैस संयंत्र लगाकर इस योजना का हिस्सा बन सकती हैं। कई राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर अतिरिक्त सब्सिडी देकर घरेलू और सामुदायिक बायोगैस संयंत्रों को बढ़ावा दे रही हैं, जिसमें संयंत्र की लागत पर 50% तक का अनुदान शामिल हो सकता है।
राज्यों में भी बढ़ रहा है दायरा
कई राज्य सरकारें अब गोबरधन मॉडल को अपने स्तर पर भी आगे बढ़ा रही हैं। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में गोशालाओं को “रूरल रिसोर्स एंड एनर्जी हब” के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है, जिसमें हर जिले में सैकड़ों की संख्या में मिनी बायोगैस प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए तकनीकी सहयोग के लिए आईआईटी दिल्ली जैसे संस्थानों को भी साझेदार बनाया जा रहा है।
आवेदन कैसे करें
इच्छुक किसान, संस्था या उद्यमी गोबरधन के एकीकृत पंजीकरण पोर्टल पर जाकर अपने प्रोजेक्ट के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। इसके अलावा अपने राज्य के ग्रामीण विकास विभाग या जिला पंचायत कार्यालय से भी संपर्क कर सब्सिडी और तकनीकी सहायता से जुड़ी जानकारी ली जा सकती है।
एक नजर में: GOBARdhan Yojana (गोबरधन योजना)
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | गोबरधन योजना (GOBARdhan) |
| शुरू होने का वर्ष | अप्रैल 2018 |
| नोडल विभाग | पेयजल और स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय |
| अब तक स्थापित संयंत्र | 650 से अधिक |
| CBG संयंत्र लक्ष्य | 2030 तक 5,000 |
| ताजा पहल | एकीकृत पंजीकरण पोर्टल |
नोट: योजना से जुड़ी सब्सिडी दर, राज्य-स्तरीय प्रावधान और लक्ष्य समय-समय पर बदल सकते हैं। अपने क्षेत्र में गोबरधन योजना से जुड़ी सटीक जानकारी के लिए जिला पंचायत कार्यालय या राज्य के ग्रामीण विकास विभाग से संपर्क करें।
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