प्लास्टिक करेंसी भारत में कब आएगी? जानें छपाई से वितरण तक पूरी प्रक्रिया
भारत में प्लास्टिक करेंसी: RBI की नई पहल से बदलेगा नोटों का भविष्य
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) एक बार फिर देश में प्लास्टिक करेंसी भारत में लागू करने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है। पटना और मुंबई में हुई RBI बोर्ड बैठकों में पॉलिमर नोटों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई है, और अब इसे लेकर एक बड़ा पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने वाला है। अगर यह योजना सफल रहती है, तो यह 2016 की नोटबंदी के बाद भारतीय करेंसी व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
प्लास्टिक करेंसी क्या होती है?
प्लास्टिक करेंसी या पॉलिमर नोट, कागज़ की जगह पॉलीप्रोपिलीन नाम के खास प्लास्टिक पदार्थ से बनाए जाते हैं। ये नोट सामान्य कागज़ी नोटों की तुलना में दो से चार गुना ज़्यादा टिकाऊ माने जाते हैं। इनमें पानी, नमी और मैल का असर बहुत कम होता है, जिससे नोट लंबे समय तक साफ और सुरक्षित बने रहते हैं। दुनिया के करीब 60 देश पहले से ही पॉलिमर नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देश शामिल हैं।
करेंसी कैसे जारी की जाती है
भारत में करेंसी जारी करने की पूरी प्रक्रिया RBI अधिनियम, 1934 के तहत तय की गई है। सबसे पहले RBI का केंद्रीय बोर्ड नए नोट की डिज़ाइन, मूल्यवर्ग और सुरक्षा फीचर्स को मंजूरी देता है। इसके बाद यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा जाता है, क्योंकि किसी भी नए नोट या करेंसी में बदलाव के लिए केंद्र सरकार की अंतिम स्वीकृति ज़रूरी होती है। मंजूरी मिलने के बाद BRBNMPL और सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SPMCIL) की प्रेस में नोटों की छपाई शुरू होती है। प्लास्टिक करेंसी भारत में इसी प्रक्रिया से गुजरते हुए तैयार होगी, बस कागज़ की जगह पॉलिमर शीट का इस्तेमाल किया जाएगा। शुरुआत में यह ₹10 और ₹20 जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों के साथ पायलट आधार पर शुरू किया जाएगा, ताकि फील्ड ट्रायल में इसकी टिकाऊपन और सुरक्षा फीचर्स को अच्छी तरह परखा जा सके।
नोट पर किसके हस्ताक्षर होते हैं
भारतीय करेंसी नोटों पर RBI गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं, न कि किसी वित्त मंत्री या प्रधानमंत्री के। यह परंपरा दशकों से चली आ रही है, जहां नोट पर छपा ‘मैं धारक को [राशि] रुपये अदा करने का वचन देता हूं’ वाला वाक्य असल में RBI गवर्नर की ओर से जारी की गई गारंटी होती है। वर्तमान में यह ज़िम्मेदारी संजय मल्होत्रा के पास है, जो 11 दिसंबर 2024 से RBI के 26वें गवर्नर के रूप में कार्यरत हैं। जब भी प्लास्टिक करेंसी भारत में आधिकारिक रूप से जारी होगी, उस पर भी वर्तमान गवर्नर के ही हस्ताक्षर छपेंगे, ठीक वैसे ही जैसे मौजूदा कागज़ी नोटों पर होता है। गवर्नर बदलने पर भविष्य में छपने वाले नोटों पर नए गवर्नर के हस्ताक्षर आ जाते हैं, जबकि पुराने हस्ताक्षर वाले नोट भी तब तक वैध बने रहते हैं जब तक RBI उन्हें चलन से बाहर नहीं करता।
करेंसी का वितरण कैसे होता है
नोट छपने के बाद इन्हें सीधे बाज़ार में नहीं भेजा जाता। सबसे पहले नए नोट RBI के क्षेत्रीय कार्यालयों और देशभर में फैले करेंसी चेस्ट (Currency Chest) तक पहुंचाए जाते हैं। ये करेंसी चेस्ट अमूमन बड़े सरकारी और निजी बैंकों की शाखाओं में स्थित होते हैं, जो RBI की ओर से नोटों के भंडारण और वितरण की ज़िम्मेदारी संभालते हैं। इसके बाद बैंक अपनी शाखाओं और ATM नेटवर्क के ज़रिए नोट आम जनता तक पहुंचाते हैं। प्लास्टिक करेंसी भारत में लॉन्च होने के बाद इसके वितरण में एक अतिरिक्त कदम जुड़ेगा — देशभर के ATM मशीनों को पॉलिमर नोट डिस्पेंस करने के लिए तकनीकी रूप से अपग्रेड (enable) किया जाएगा, क्योंकि मौजूदा कई ATM मशीनें केवल कागज़ी नोटों के हिसाब से डिज़ाइन की गई हैं।
शुरुआत में कौन-से नोट होंगे प्लास्टिक के
टेंडर दस्तावेज़ों के अनुसार, शुरुआती चरण में कुल 68,000 रीम पॉलिमर शीट की ज़रूरत बताई गई है, जिसे दो अलग-अलग मूल्यवर्ग के नोटों के लिए 34,000-34,000 रीम में बांटा गया है (एक रीम में 500 शीट होती हैं)। ये दोनों मूल्यवर्ग ₹10 और ₹20 के नोट हैं, जिनका इस्तेमाल सबसे ज़्यादा रोज़मर्रा के लेन-देन में होता है। टेंडर में हिस्सा लेने वाली कंपनियों के पास कम से कम तीन साल का अनुभव होना अनिवार्य है, साथ ही उनके पास पहले किसी केंद्रीय बैंक या करेंसी प्रिंटिंग एजेंसी को सुरक्षा फीचर वाली पॉलिमर शीट सप्लाई करने का रिकॉर्ड भी होना चाहिए। कंपनियों को टेस्टिंग के लिए सैंपल शीट भी जमा करनी होगी।
क्या कागज़ी नोट पूरी तरह बंद हो जाएंगे?
फिलहाल इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि कागज़ी करेंसी को पूरी तरह बंद किया जाएगा। मौजूदा योजना के अनुसार, शुरुआत में दोनों तरह के नोट — कागज़ी और प्लास्टिक — एक साथ चलन में रहेंगे। यदि ₹10 और ₹20 के पॉलिमर नोटों का पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तभी भविष्य में बड़े मूल्यवर्ग के नोटों को भी इसी तकनीक से छापने पर विचार किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्लास्टिक करेंसी भारत में इसका फुल-स्केल रोलआउट साल 2027 से देखने को मिल सकता है, हालांकि यह पूरी तरह पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों पर निर्भर करेगा।
प्लास्टिक करेंसी के फायदे
प्लास्टिक करेंसी भारत में लागू होने से आम जनता को कई फायदे मिल सकते हैं। सबसे बड़ा फायदा नोटों की टिकाऊपन है — बारिश में भीगने या धुलाई में खराब होने की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी। इसके अलावा पॉलिमर नोटों में सुरक्षा फीचर्स को और बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकता है, जिससे नकली नोटों (Fake Currency) पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। लंबे समय में यह सरकार के लिए भी किफायती साबित हो सकता है, क्योंकि टिकाऊ नोटों को बार-बार छापने की ज़रूरत कम पड़ती है। यह कदम भारत की डिजिटल और आधुनिक वित्तीय व्यवस्था को भी मज़बूत करने में सहायक हो सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, प्लास्टिक करेंसी भारत में लाने की दिशा में RBI का यह कदम भारतीय करेंसी व्यवस्था के इतिहास में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। नोट जारी करने से लेकर हस्ताक्षर और वितरण तक, हर चरण में पहले जैसी ही प्रक्रिया अपनाई जाएगी, बस कागज़ की जगह टिकाऊ पॉलिमर शीट का इस्तेमाल होगा। अब सबकी निगाहें 18 अगस्त 2026 को खुलने वाले ग्लोबल टेंडर पर टिकी हैं, जिसके बाद यह साफ होगा कि पायलट प्रोजेक्ट कब और कैसे शुरू होगा।