गुजरात में बना विंबलडन का तौलिया, अब हर तरफ हो रहा वायरल
विंबलडन का तौलिया गुजरात में बनता है, जानिए यह चौंकाने वाली सच्चाई
लंदन के ऑल इंग्लैंड क्लब में जब कोई खिलाड़ी पसीने से लथपथ होकर उस मशहूर हरे-बैंगनी तौलिये से खुद को पोंछता है, तो शायद ही किसी फैन को पता होता है कि यह तौलिया दुनिया के दूसरे कोने से नहीं, बल्कि सीधे भारत के गुजरात राज्य से आया है। जी हां, विंबलडन का तौलिया गुजरात में बनता है — और यह कोई नई बात नहीं, बल्कि पिछले 17 सालों से यही सच्चाई है। यह जानकारी अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, और भारतीयों के लिए गर्व की एक और वजह बन गई है।
कैसे शुरू हुई यह कहानी?
विंबलडन के तौलिये की कहानी 1850 से शुरू होती है, जब ब्रिटेन की टेक्सटाइल कंपनी क्रिस्टी (Christy) ने आधुनिक टेरी तौलिया बनाने की शुरुआत की थी। 1988 में क्रिस्टी को विंबलडन टूर्नामेंट का आधिकारिक तौलिया आपूर्तिकर्ता बनाया गया, और तब से यह तौलिया मैनचेस्टर में बनता था। लेकिन 2006 में भारत की दिग्गज टेक्सटाइल कंपनी वेलस्पन लिविंग (Welspun Living) ने क्रिस्टी को खरीद लिया, और धीरे-धीरे तौलिये का उत्पादन ब्रिटेन से भारत शिफ्ट होने लगा। 2009 से आज तक, हर एक आधिकारिक विंबलडन तौलिया गुजरात के वापी शहर में स्थित वेलस्पन की फैक्ट्री में ही बुना जाता है।
गुजरात का वापी शहर कैसे बना विंबलडन का ‘सीक्रेट लोकेशन’
वेलस्पन ने 1993 में गुजरात के वापी में अपनी पहली टेरी तौलिया फैक्ट्री शुरू की थी। उस समय शायद ही किसी को यकीन था कि तुर्की जैसे पारंपरिक तौलिया-निर्माता देशों को छोड़कर भारत में इतने उच्च स्तर के तौलिये बनाए जा सकते हैं। लेकिन वेलस्पन ने यह करके दिखाया। आज कंपनी गुजरात के वापी और अंजार (कच्छ) में अपनी बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स चलाती है, और अमेरिका के टॉप 10 में से 9 बड़े रिटेलर्स को तौलिये सप्लाई करती है। कंपनी अमेरिका में बिकने वाले हर पांच तौलियों में से एक तौलिया बनाती है।
एक तौलिया बनाने में लगते हैं पूरे 7 दिन
विंबलडन का तौलिया कोई साधारण प्रोडक्ट नहीं है। इसका डिज़ाइन टूर्नामेंट शुरू होने से करीब 18 महीने पहले ही तय कर दिया जाता है — रंग, पैटर्न और स्पेसिफिकेशन सब कुछ पहले से प्लान किया जाता है। इसके बाद हर तौलिये को ‘यार्न-डाइड जैक्वार्ड वीविंग’ नाम की खास तकनीक से बुना जाता है, जिसमें रंगीन धागों को सीधे कपड़े में बुना जाता है ताकि तौलिया दोनों तरफ से एक जैसा दिखे। एक तौलिया तैयार होने में करीब 7 दिन का समय लगता है। पुरुषों के तौलिये में विंबलडन के पारंपरिक हरे, बैंगनी और सुनहरे रंग होते हैं, जबकि महिलाओं के तौलिये में हर साल एक नया, ताज़ा रंग जोड़ा जाता है।
आधिकारिक तौलिये का साइज़ लगभग 70×133 सेंटीमीटर होता है और इसका वज़न करीब 500 ग्राम होता है — पूरी तरह से शुद्ध कॉटन से बना हुआ। हर साल विंबलडन में करीब 50,000 तौलिये बेचे जाते हैं, जो टूर्नामेंट का दूसरा सबसे लोकप्रिय स्मृति-चिन्ह (मेमोरेबिलिया) है।
दिग्गज खिलाड़ियों की पसंद बना यह ‘मेड इन गुजरात’ तौलिया
रोजर फेडरर, सेरेना विलियम्स, नोवाक जोकोविच और एंडी मरे जैसे दिग्गज खिलाड़ी मैच के दौरान इसी तौलिये का इस्तेमाल करते आए हैं, और अक्सर जीत के बाद इसे यादगार के तौर पर अपने साथ ले जाते हैं। वेलस्पन की मैनेजिंग डायरेक्टर दीपाली गोयनका ने एक इंटरव्यू में कहा था, “जब आप एंडी मरे या रोजर फेडरर या सेरेना विलियम्स को वह तौलिया इस्तेमाल करते देखते हैं, तो टेनिस फैंस के लिए वह पागल कर देने वाला पल होता है।” उन्होंने आगे कहा, “यह एक भावनात्मक एहसास है, गर्व की बात है। जब खिलाड़ी उस तौलिये का इस्तेमाल करके उसे फेंकते हैं, तो हमें कंपनी के तौर पर एक अलग ही तरह का सुकून मिलता है।”
अब सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रही है यह खबर?
हालांकि यह तथ्य सालों से सच है, लेकिन हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स के दोबारा सामने आने के बाद यह खबर सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल रही है। लोग हैरान हैं कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और परंपरावादी टेनिस टूर्नामेंट का इतना अहम हिस्सा — जिसे हर मैच में करोड़ों लोग टीवी पर देखते हैं — असल में भारत के एक छोटे से औद्योगिक शहर वापी में बनता है। यूज़र्स इसे “मेड इन इंडिया” की एक और बड़ी जीत बता रहे हैं, और कई लोग इसे भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री की वैश्विक ताकत का सबूत मान रहे हैं।
टिकाऊपन (Sustainability) में भी आगे है वेलस्पन
वेलस्पन की अंजार फैक्ट्री ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है — यहां तौलिया बनाने की पूरी प्रक्रिया में अब ताजे पानी (freshwater) का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया गया है, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और अन्य सस्टेनेबिलिटी पहलों की मदद से। कंपनी को इसके लिए कई अंतरराष्ट्रीय अवार्ड भी मिल चुके हैं, जिसमें ESG रैंकिंग में टॉप 3% में जगह बनाना शामिल है। यानी विंबलडन का यह मशहूर तौलिया न सिर्फ प्रीमियम क्वालिटी का है, बल्कि पर्यावरण के लिहाज़ से भी ज़िम्मेदार तरीके से बनाया जाता है।
भारत के लिए क्यों है यह गर्व की बात?
यह कहानी सिर्फ एक तौलिये की नहीं, बल्कि भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री की बढ़ती वैश्विक साख की है। वेलस्पन आज 60 से ज़्यादा देशों में अपने उत्पाद बेचती है और भारत से होम टेक्सटाइल एक्सपोर्ट करने वाली सबसे बड़ी कंपनी है। जब दुनिया भर के करोड़ों दर्शक विंबलडन का फाइनल देखते हैं, और चैंपियन खिलाड़ी अपने पसीने को उस मशहूर तौलिये से पोंछता है, तो पर्दे के पीछे गुजरात के वापी और अंजार की फैक्ट्रियों में काम करने वाले हज़ारों भारतीय मज़दूरों और इंजीनियरों की मेहनत की झलक भी उसमें शामिल होती है — भले ही इसकी चर्चा शायद ही कभी होती हो।
अगली बार जब आप विंबलडन का कोई मैच देखें और किसी खिलाड़ी को वह हरा-बैंगनी तौलिया इस्तेमाल करते देखें, तो याद रखिए — यह टुकड़ा-टुकड़ा ब्रिटिश परंपरा नहीं, बल्कि गुजरात की मेहनत और भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री की एक शानदार, कम-चर्चित सफलता की कहानी है।







