GOBARdhan Yojana क्या है? कैसे काम करती है और किसे लाभ मिलता है
गांवों में पशुओं का गोबर, कृषि अवशेष और दूसरे जैविक कचरे को अक्सर बेकार समझ लिया जाता है, लेकिन इन्हीं संसाधनों से बायोगैस, कम्प्रेस्ड बायोगैस यानी CBG और जैविक खाद तैयार की जा सकती है। GOBARdhan Yojana इसी सोच पर आधारित सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य जैविक कचरे को ऊर्जा, खाद और आय के उपयोगी स्रोत में बदलना है।
GOBARdhan का पूरा नाम Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan है। इसकी शुरुआत 2018 में हुई थी। समय के साथ इसके तहत गांवों में सामुदायिक और क्लस्टर आधारित बायोगैस प्लांट से लेकर बड़े CBG प्रोजेक्ट तक अलग-अलग गतिविधियों को जोड़ा गया है।
GOBARdhan Yojana क्या है?
GOBARdhan का मूल उद्देश्य पशु गोबर, कृषि अवशेष, रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे और अन्य बायो-वेस्ट का उपयोग करके बायोगैस, बायो-CNG/CBG और जैविक खाद तैयार करना है।
ग्रामीण स्तर पर यह पहल स्वच्छता और कचरा प्रबंधन से भी जुड़ी है। जब गोबर और जैविक कचरे को खुले में छोड़ने के बजाय प्लांट में इस्तेमाल किया जाता है, तो उससे ऊर्जा और खाद जैसे उपयोगी उत्पाद प्राप्त किए जा सकते हैं।
GOBARdhan को Swachh Bharat Mission-Grameen Phase II के Solid Waste Management कार्यक्रम से भी जोड़ा गया है। इसके तहत गांवों में सामुदायिक और क्लस्टर आधारित बायोगैस प्लांट स्थापित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता दी जाती है।
GOBARdhan कैसे काम करती है?
इस पहल को एक ही प्रकार के प्लांट या एक ही तरह की सब्सिडी वाली योजना समझना सही नहीं होगा। इसमें छोटे और सामुदायिक बायोगैस प्लांट से लेकर बड़े CBG प्रोजेक्ट तक अलग-अलग व्यवस्थाएं शामिल हैं।
छोटे या सामुदायिक स्तर पर पशुओं का गोबर, रसोई का जैविक कचरा, फसल अवशेष और अन्य जैविक सामग्री एकत्र की जाती है। इन्हें बायोगैस प्लांट में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जैविक प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इससे बायोगैस बनती है और साथ में निकलने वाली स्लरी को जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
बड़े स्तर पर यही विचार CBG प्लांट में आगे बढ़ता है। पर्याप्त मात्रा में जैविक कच्चा माल एकत्र करके उससे बायोगैस बनाई जाती है, जिसे शुद्ध और अपग्रेड करके Compressed Biogas (CBG) के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
GOBARdhan से किसे लाभ मिल सकता है?
GOBARdhan से लाभ केवल व्यक्तिगत किसान तक सीमित नहीं है। इसके अलग-अलग हिस्सों में ग्राम पंचायत, स्वयं सहायता समूह, सहकारी संस्थाएं, निजी संस्थाएं, ग्रामीण उद्यमी, किसान और अन्य पात्र संस्थाएं अपनी भूमिका के अनुसार लाभ या सहायता से जुड़ सकती हैं।
हालांकि पात्रता हर गतिविधि में एक जैसी नहीं होती। सामुदायिक बायोगैस प्लांट, व्यक्तिगत बायोगैस प्लांट और CBG प्रोजेक्ट के लिए नियम और सहायता का तरीका अलग हो सकता है।
इसीलिए यह मान लेना सही नहीं है कि हर किसान को GOBARdhan के तहत एक निश्चित राशि की सब्सिडी सीधे मिलती है।
GOBARdhan में कितनी सरकारी सहायता मिलती है?
यह सबसे महत्वपूर्ण बात है कि GOBARdhan में सहायता प्लांट के प्रकार और संबंधित सरकारी कार्यक्रम पर निर्भर करती है।
Swachh Bharat Mission-Grameen Phase II के तहत सामुदायिक और क्लस्टर आधारित बायोगैस प्लांट के लिए पूरे कार्यक्रम की अवधि 2020-21 से 2026-27 तक प्रति जिले अधिकतम ₹50 लाख तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान है। यह सहायता सीधे हर व्यक्ति को ₹50 लाख देने वाली सब्सिडी नहीं है; यह जिला स्तर पर पात्र सामुदायिक/क्लस्टर परियोजनाओं के लिए उपलब्ध व्यवस्था है।
दूसरी ओर, अगस्त 2026 में केंद्र सरकार ने GOBARdhan को National Circular Bioenergy Scheme के रूप में नए राष्ट्रीय ढांचे के साथ मंजूरी दी। इस योजना का कुल परिव्यय ₹23,731 करोड़ है और इसका कार्यान्वयन वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक प्रस्तावित है।
इस नए ढांचे में CBG परियोजनाओं के लिए पूंजीगत सहायता, स्थिर मूल्य व्यवस्था, ऑफटेक की व्यवस्था, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और क्रेडिट सपोर्ट जैसे अलग-अलग प्रावधान शामिल हैं।
CBG प्लांट लगाने वालों के लिए क्या अवसर हैं?
CBG यानी Compressed Biogas GOBARdhan के बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक हिस्से से जुड़ा है। इसमें गोबर, कृषि अवशेष, प्रेसमड, जैविक नगर कचरा और दूसरे उपयुक्त बायोमास से गैस तैयार करके उसे प्राकृतिक गैस के उपयोग के अनुरूप अपग्रेड किया जाता है।
2026 में मंजूर नए राष्ट्रीय ढांचे के तहत पात्र नए CBG प्रोजेक्ट्स के लिए प्रति टन प्रतिदिन (TPD) स्थापित CBG क्षमता पर अधिकतम ₹2 करोड़ तक की पूंजीगत सहायता का प्रावधान किया गया है। इसमें परियोजना से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण feedstock और organic manure value-chain assets भी शामिल किए जा सकते हैं, लेकिन वास्तविक सहायता पात्रता और स्वीकृत परियोजना के नियमों पर निर्भर करेगी।
इसलिए CBG प्लांट को सामान्य ग्रामीण बायोगैस प्लांट के समान समझना सही नहीं है। इसकी लागत, जमीन, कच्चे माल की आवश्यकता, तकनीक, वित्त और सरकारी सहायता का ढांचा काफी अलग होता है।
किसानों को GOBARdhan से क्या फायदा हो सकता है?
किसानों के लिए इसका सबसे सीधा फायदा पशु गोबर और कृषि अवशेष के बेहतर उपयोग से जुड़ा है। यदि स्थानीय स्तर पर बायोगैस प्लांट स्थापित होता है, तो जैविक कचरे से ऊर्जा और जैविक खाद तैयार की जा सकती है।
बड़े CBG प्रोजेक्ट किसानों और अन्य स्थानीय लोगों के लिए feedstock supply, संग्रह, परिवहन और प्लांट संचालन जैसी गतिविधियों में आर्थिक अवसर भी पैदा कर सकते हैं। हालांकि किसी किसान की वास्तविक कमाई इस बात पर निर्भर करेगी कि वह किस परियोजना से जुड़ा है, कच्चा माल कितना उपलब्ध है और स्थानीय व्यवस्था में भुगतान की क्या शर्तें हैं।
GOBARdhan में बायोगैस और CBG में क्या अंतर है?
बायोगैस आम तौर पर स्थानीय स्तर पर खाना पकाने, बिजली उत्पादन या अन्य उपयोगों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। इसके उत्पादन के साथ जैविक स्लरी भी निकलती है, जिसे उचित प्रक्रिया के बाद खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
CBG के लिए बायोगैस को आगे शुद्ध और अपग्रेड किया जाता है ताकि उसमें मीथेन की मात्रा बढ़ाई जा सके और इसे compressed gas के रूप में उपयोग किया जा सके। इसलिए CBG प्लांट सामान्य घरेलू या छोटे बायोगैस प्लांट की तुलना में अधिक बड़े और तकनीकी प्रोजेक्ट होते हैं।
GOBARdhan के लिए आवेदन कैसे होता है?
आवेदन का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस प्रकार की परियोजना स्थापित करना चाहते हैं। GOBARdhan का Unified Registration Portal बायोगैस प्लांट की registration व्यवस्था उपलब्ध कराता है।
वर्तमान पोर्टल के अनुसार, ऐसे सरकारी या निजी संस्थान जो बायोगैस प्लांट चला रहे हैं या स्थापित करना चाहते हैं, registration कर सकते हैं। पोर्टल पर registration के लिए डिजाइन की गई गैस उत्पादन क्षमता कम से कम 10 घन मीटर प्रतिदिन होने की शर्त दी गई है।
हालांकि केवल पोर्टल पर registration करने का अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को अपने आप subsidy मिल जाएगी। जिस सरकारी योजना या सहायता के तहत लाभ लेना है, उसके अलग eligibility और approval नियम लागू हो सकते हैं।
GOBARdhan में कौन-कौन से कच्चे माल का इस्तेमाल हो सकता है?
प्लांट के प्रकार के अनुसार कच्चे माल में पशु गोबर, कृषि अवशेष, रसोई का जैविक कचरा, बाजार से निकलने वाला जैविक कचरा और अन्य उपयुक्त biomass शामिल हो सकता है।
किसी CBG या बड़े बायोगैस प्रोजेक्ट के लिए केवल कच्चे माल की उपलब्धता पर्याप्त नहीं होती। उसकी नियमित supply, संग्रह, परिवहन, storage और processing की व्यवस्था भी जरूरी होती है।
यही कारण है कि CBG प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले feedstock availability का वास्तविक आकलन करना महत्वपूर्ण होता है।
GOBARdhan से गांवों को क्या फायदा हो सकता है?
GOBARdhan का उद्देश्य केवल गैस बनाना नहीं है। इसके पीछे waste-to-wealth और circular economy का विचार भी है। गांव में उपलब्ध जैविक संसाधनों का दोबारा उपयोग करके स्वच्छता, ऊर्जा और जैविक खाद से जुड़े स्थानीय अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
एक सफल परियोजना से गोबर और जैविक कचरे के प्रबंधन में सुधार के साथ रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि किसी गांव में वास्तविक लाभ परियोजना की क्षमता, प्रबंधन, कच्चे माल और स्थानीय बाजार पर निर्भर करेगा।
GOBARdhan Yojana से जुड़ी जरूरी सावधानी
GOBARdhan के नाम पर मिलने वाली सहायता को लेकर इंटरनेट पर कई बार एक निश्चित प्रतिशत या निश्चित रुपये की सब्सिडी बताई जाती है। ऐसी जानकारी को बिना सरकारी स्रोत देखे सही नहीं मानना चाहिए।
बायोगैस प्लांट, सामुदायिक प्लांट और CBG प्लांट के लिए सहायता के नियम अलग हो सकते हैं। इसके अलावा राज्य और केंद्र की अलग-अलग योजनाओं में भी पात्रता और आवेदन प्रक्रिया अलग हो सकती है।
इसलिए आवेदन या निवेश से पहले GOBARdhan के आधिकारिक पोर्टल और संबंधित मंत्रालय/राज्य विभाग की वर्तमान अधिसूचना में पात्रता, सहायता, दस्तावेज और समयसीमा की जांच करना जरूरी है।
निष्कर्ष
GOBARdhan का मूल विचार गांवों और कृषि क्षेत्र से निकलने वाले जैविक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलना है। इससे बायोगैस, जैविक खाद और बड़े स्तर पर CBG उत्पादन की संभावनाएं बनती हैं।
2026 में मंजूर नए National Circular Bioenergy Scheme ने GOBARdhan के CBG हिस्से को एक बड़े राष्ट्रीय ढांचे से जोड़ा है। वहीं ग्रामीण स्तर पर सामुदायिक और क्लस्टर बायोगैस प्लांट के लिए SBM-Grameen के तहत सहायता की व्यवस्था जारी है। इसलिए किसी व्यक्ति या संस्था के लिए सही लाभ जानने के लिए पहले यह तय करना जरूरी है कि वह किस प्रकार का प्लांट और किस योजना के तहत परियोजना शुरू करना चाहता है।
