GOBARdhan Yojana Subsidy: कितनी सहायता मिलती है और आवेदन कैसे करें
गांवों में गोबर, कृषि अवशेष और दूसरे जैविक कचरे से बायोगैस या CBG बनाने की परियोजना शुरू करने वालों के लिए सरकारी सहायता की जानकारी काफी महत्वपूर्ण है। लेकिन GOBARdhan Yojana Subsidy को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि हर किसान या व्यक्ति को एक निश्चित रकम सीधे सब्सिडी के रूप में मिलती है। वास्तव में सहायता प्लांट के प्रकार, परियोजना और संबंधित सरकारी कार्यक्रम पर निर्भर करती है।
वर्तमान व्यवस्था में सामुदायिक और क्लस्टर आधारित बायोगैस प्लांट के लिए Swachh Bharat Mission-Grameen Phase II के तहत अलग वित्तीय सहायता है, जबकि अगस्त 2026 में मंजूर National Circular Bioenergy Scheme के तहत CBG परियोजनाओं के लिए अलग capital assistance framework बनाया गया है। इसलिए आवेदन करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी परियोजना किस श्रेणी में आती है।GOBARdhan Yojana: अब गोबर और कचरे से भी होगी कमाई, जानें पूरी योजना
GOBARdhan Yojana Subsidy क्या है?
GOBARdhan के तहत मिलने वाली सहायता को एक सामान्य, सभी लोगों के लिए समान सब्सिडी नहीं माना जा सकता। सरकार अलग-अलग प्रकार की बायोगैस और CBG परियोजनाओं के लिए अलग सहायता व्यवस्था चला रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में community और cluster-based biogas plants के लिए SBM-Grameen Phase II के तहत प्रत्येक जिले में अधिकतम ₹50 लाख तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध है। यह राशि जिला स्तर पर पात्र परियोजनाओं के लिए है; इसका मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्तिगत किसान आवेदन करके सीधे ₹50 लाख प्राप्त कर सकता है।
दूसरी ओर, बड़े CBG projects के लिए 6 अगस्त 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने National Circular Bioenergy Scheme को मंजूरी दी। इस योजना का कुल परिव्यय ₹23,731 करोड़ है और इसका implementation FY 2026-27 से FY 2035-36 तक निर्धारित किया गया है।
बायोगैस प्लांट के लिए कितनी सहायता मिलती है?
अगर बात SBM-Grameen के तहत community या cluster-based biogas plant की है, तो प्रति जिला ₹50 लाख तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध है। सरकार के अनुसार यह सहायता गांवों, ब्लॉक या जिले में ऐसे प्लांट स्थापित करने के लिए है, जिनमें पशु अपशिष्ट, रसोई का जैविक कचरा, कृषि अवशेष और बाजार से निकलने वाला जैविक कचरा इस्तेमाल किया जा सकता है।
यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि यह अधिकतम वित्तीय सहायता की सीमा है, न कि प्रत्येक प्लांट के लिए तय भुगतान। किसी परियोजना को वास्तव में कितनी सहायता मिलेगी, यह उसकी पात्रता, स्वीकृत योजना, परियोजना संरचना और संबंधित सरकारी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
CBG Plant पर कितनी Capital Assistance मिल सकती है?
2026 में मंजूर National Circular Bioenergy Scheme के तहत पात्र greenfield CBG projects के लिए स्थापित CBG capacity के आधार पर ₹2 करोड़ प्रति TPD तक capital assistance का प्रावधान है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई परियोजना पात्रता की सभी शर्तें पूरी करती है और उसकी स्थापित क्षमता 5 TPD है, तो केवल गणितीय अधिकतम सीमा ₹10 करोड़ तक बनती है। लेकिन इसे स्वतः मिलने वाली राशि नहीं समझना चाहिए। वास्तविक सहायता पात्र परियोजना, स्वीकृति और लागू दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगी।
यह सहायता केवल मुख्य प्लांट मशीनरी तक सीमित नहीं है। सरकारी जानकारी के अनुसार feedstock aggregation, organic manure processing और value addition से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण assets भी इस framework में शामिल हैं। क्षमता बढ़ाने वाली eligible brownfield projects को भी इस component में शामिल किया गया है।
क्या हर किसान को GOBARdhan के तहत सब्सिडी मिलती है?
नहीं। हर किसान को एक निश्चित GOBARdhan subsidy मिलती है, ऐसा कहना सही नहीं होगा।
किसान इस ecosystem में feedstock supplier, परियोजना से जुड़े लाभार्थी, सामुदायिक प्लांट के भागीदार या किसी पात्र परियोजना के हिस्से के रूप में जुड़ सकता है। लेकिन subsidy या financial assistance किसे मिलेगी, यह संबंधित परियोजना और योजना के नियमों से तय होगा।
इसी तरह घर के लिए छोटा biogas plant लगाने और commercial CBG plant स्थापित करने की सरकारी सहायता को भी एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए।
GOBARdhan Subsidy के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
GOBARdhan के Unified Registration Portal के अनुसार, सरकारी या निजी entity जो biogas plant चला रही है या स्थापित करना चाहती है, registration कर सकती है। पोर्टल पर registration के लिए designed gas production capacity कम से कम 10 cubic metre per day बताई गई है।
इसके बाद यदि प्लांट को किसी दूसरे मंत्रालय या विभाग की सहायता लेनी है, तो registration number संबंधित benefits/support की प्रक्रिया में जरूरी हो सकता है। इसका मतलब यह है कि portal registration और financial assistance की मंजूरी दो अलग चीजें हैं।
GOBARdhan Portal पर Registration कैसे करें?
Biogas plant के लिए registration GOBARdhan Unified Registration Portal के माध्यम से किया जा सकता है। One-time registration में authorised person का नाम, designation, email और mobile number जैसी जानकारी दर्ज करनी होती है। Portal पर email और mobile OTP verification की व्यवस्था भी दी गई है।
Registration पूरा होने के बाद संबंधित plant/project की जानकारी आगे दर्ज की जाती है। पोर्टल पर plant की क्षमता, feedstock और अन्य परियोजना संबंधी विवरण मांगे जा सकते हैं।
ध्यान रखें कि registration certificate मिल जाना subsidy sanction होने के बराबर नहीं है। जिस सहायता के लिए आवेदन किया जा रहा है, उसकी अलग eligibility और approval प्रक्रिया हो सकती है।
Subsidy के लिए कौन-कौन से दस्तावेज लग सकते हैं?
दस्तावेज परियोजना और संबंधित सहायता कार्यक्रम के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए सभी applicants के लिए एक ही fixed document list बताना सही नहीं होगा।
बड़े CBG projects से जुड़ी सरकारी application requirements में उदाहरण के तौर पर Detailed Project Report (DPR), GOBARdhan Registration Certificate, financing से संबंधित documents, bank sanction letter जहां लागू हो, plant site की photographs और कुछ regulatory approvals जैसे दस्तावेज शामिल हो सकते हैं।
इसलिए आवेदन से पहले संबंधित योजना की वर्तमान document checklist देखना जरूरी है।
Subsidy पाने के लिए DPR क्यों जरूरी है?
बड़े biogas या CBG project में Detailed Project Report यानी DPR परियोजना की व्यवहारिकता समझाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। इसमें plant की capacity, technology, feedstock, जमीन, अनुमानित लागत, वित्तीय व्यवस्था और उत्पादन जैसी जानकारी शामिल हो सकती है।
CBG जैसी व्यावसायिक परियोजना में केवल यह बताना पर्याप्त नहीं होता कि आसपास बहुत गोबर या कृषि अवशेष उपलब्ध है। नियमित feedstock supply, transportation, processing, gas evacuation और बाजार की व्यवस्था भी परियोजना की viability के लिए महत्वपूर्ण होती है।
क्या बैंक से Loan लेकर प्लांट लगाया जा सकता है?
बड़ी बायोगैस और CBG परियोजनाओं में बैंक या वित्तीय संस्थाओं से financing की व्यवस्था की जा सकती है। GOBARdhan portal पर project details में loan से संबंधित जानकारी दर्ज करने का प्रावधान भी मौजूद है।
2026 की National Circular Bioenergy Scheme में भी access to finance और credit support को framework का हिस्सा बनाया गया है। इसका उद्देश्य eligible CBG projects के लिए financing को आसान बनाना है।
हालांकि loan मिलना अपने आप में सरकारी subsidy की मंजूरी नहीं है। दोनों की eligibility और प्रक्रिया अलग हो सकती है।
आवेदन करने से पहले किन बातों की जांच करें?
सबसे पहले यह तय करें कि आपका प्रस्ताव छोटा biogas plant, community/cluster plant या commercial CBG plant है। इसके बाद उसी के अनुसार संबंधित सरकारी सहायता की जानकारी देखें।
दूसरा, उपलब्ध गोबर और दूसरे biomass की मात्रा का वास्तविक आकलन करें। केवल अनुमान के आधार पर बड़ी क्षमता का प्लांट तय करने से बाद में feedstock की कमी हो सकती है।
तीसरा, जमीन, पानी, बिजली, transport, plant technology, environmental और अन्य जरूरी approvals तथा उत्पाद की बिक्री/ऑफटेक व्यवस्था की जांच करें।
GOBARdhan Subsidy को लेकर जरूरी सावधानी
किसी वेबसाइट, एजेंट या व्यक्ति द्वारा यह दावा किया जाए कि “हर किसान को ₹50 लाख की GOBARdhan subsidy मिलेगी”, तो ऐसी जानकारी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। आधिकारिक व्यवस्था में ₹50 लाख प्रति जिला की सहायता community/cluster-based biogas plants के लिए है।
इसी तरह CBG के लिए ₹2 करोड़ प्रति TPD तक की capital assistance को भी automatic cash subsidy नहीं समझना चाहिए। यह eligible projects के लिए capital assistance framework है और इसकी वास्तविक उपलब्धता लागू नियमों तथा project approval पर निर्भर करेगी।
निष्कर्ष
GOBARdhan के तहत सरकारी सहायता का ढांचा अब बायोगैस से लेकर बड़े CBG projects तक अलग-अलग स्तरों पर फैला हुआ है। ग्रामीण community और cluster-based biogas plants के लिए SBM-Grameen Phase II में प्रति जिले ₹50 लाख तक की सहायता उपलब्ध है, जबकि 2026 में मंजूर National Circular Bioenergy Scheme ने eligible CBG projects के लिए ₹2 करोड़ प्रति TPD तक की capital assistance का प्रावधान किया है।
इसलिए आवेदन करने से पहले अपनी परियोजना की category, क्षमता, feedstock, वित्तीय जरूरत और संबंधित सरकारी scheme की eligibility को समझना सबसे जरूरी है। केवल subsidy की रकम देखकर biogas या CBG project शुरू करना उचित नहीं है; परियोजना की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता भी जांचनी चाहिए।