‘प्रधान पति’ प्रथा खत्म करने की पहल: ‘Say No To Proxy Sarpanch’ से पंचायतों में महिलाओं को मिलेगा असली अधिकार
गांवों में लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए पंचायती राज व्यवस्था बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन कई जगहों पर ऐसा देखा जाता है कि महिला सरपंच चुनी जाती हैं, लेकिन असल में फैसले उनके पति या परिवार के पुरुष सदस्य लेते हैं। इस प्रथा को ‘Proxy Sarpanch
(प्रधान पति)’ कहा जाता है।

इसी समस्या को खत्म करने और महिलाओं के असली नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए Ministry of Panchayati Raj ने ‘Say No To Proxy Sarpanch (प्रधान पति)’ अभियान शुरू किया है। यह अभियान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) से शुरू हुआ है और 18 मार्च 2026 तक चलेगा।
जूनागढ़ में अच्छी पहल
Junagadh जिला पंचायत ने इस दिशा में एक अच्छी पहल की है। जिला पंचायत ने फैसला किया है कि जिले के 9 तालुकों में से हर तालुका से एक ऐसी महिला सरपंच को सम्मानित किया जाएगा जो अपनी ग्राम पंचायत का नेतृत्व खुद और स्वतंत्र रूप से कर रही हैं।
इन महिला सरपंचों को सम्मान के साथ प्रोत्साहन राशि (इनाम) भी दी जाएगी। इसका उद्देश्य उन महिलाओं को पहचान देना है जो बिना किसी दबाव के पंचायत का काम संभाल रही हैं।
‘प्रॉक्सी सरपंच (प्रधान पति)’ प्रथा क्या है?
‘प्रॉक्सी सरपंच (प्रधान पति)’ प्रथा उस स्थिति को कहते हैं जब महिला सरपंच चुनी तो जाती हैं, लेकिन पंचायत के फैसले उनके पति या अन्य पुरुष रिश्तेदार लेते हैं।
भारत में पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण होने के कारण कई महिलाएं सरपंच बनती हैं। लेकिन कुछ गांवों में उनके पति या परिवार के पुरुष सदस्य ही कामकाज संभाल लेते हैं। ऐसे लोगों को अक्सर “सरपंच पति”, “प्रधान पति” या “मुखिया पति” कहा जाता है।
अभियान का उद्देश्य
‘Say No To Proxy Sarpanch (प्रधान पति)’ अभियान का मुख्य उद्देश्य गांवों में महिलाओं के नेतृत्व को मजबूत करना है। इसके मुख्य लक्ष्य हैं:
- महिला सरपंचों के अधिकारों का सम्मान करना
- पंचायतों में प्रॉक्सी नेतृत्व को रोकना
- लोगों को महिला नेताओं का समर्थन करने के लिए जागरूक करना
- गांवों में काम कर रही असली महिला सरपंचों के उदाहरण सामने लाना
सरकार के कदम
इस समस्या को रोकने के लिए Ministry of Panchayati Raj ने कुछ सुझाव और कदम भी उठाए हैं:
- प्रॉक्सी शासन के मामलों में सख्त कार्रवाई
- शिकायत करने के लिए हेल्पलाइन और महिला निगरानी समितियाँ
- सही जानकारी देने वालों के लिए इनाम (व्हिसलब्लोअर रिवॉर्ड)
- नागरिकों को पंचायत के कामकाज पर नजर रखने के लिए प्रोत्साहित करना
महिलाओं को मजबूत बनाने की योजना
महिला सरपंचों को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएँ भी सुझाई गई हैं:
- महिलाओं के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम
- मेंटॉरशिप और नेतृत्व प्रशिक्षण
- प्रशासनिक और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने के कार्यक्रम
- पंचायतों में महिलाओं के काम की निगरानी व्यवस्था
भारत में पंचायती राज व्यवस्था
भारत में पंचायती राज व्यवस्था गांवों में स्थानीय शासन की प्रणाली है। इसे मजबूत बनाने के लिए 73rd Constitutional Amendment Act लागू किया गया था।
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इस व्यवस्था के तीन स्तर होते हैं:
- ग्राम पंचायत – गांव स्तर
- पंचायत समिति – ब्लॉक स्तर
- जिला परिषद – जिला स्तर
इस कानून के तहत पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण भी दिया गया है, जिससे वे स्थानीय शासन में भाग ले सकें।
निष्कर्ष:
‘Say No To Proxy Sarpanch (प्रधान पति)’ अभियान महिलाओं को सशक्त बनाने और गांवों में लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे महिला सरपंचों को स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका मिलेगा और पंचायतों में उनकी वास्तविक भागीदारी बढ़ेगी।







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