पंचायतों में महिला नेतृत्व को सशक्त बनाने पर जोर: राष्ट्रीय महिला जनप्रतिनिधि सम्मेलन आयोजित

सम्मेलन में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री Rajiv Ranjan Singh, महिला एवं बाल विकास मंत्री Annpurna Devi, पंचायती राज राज्य मंत्री S. P. Singh Baghel और युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री Raksha Nikhil Khadse मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव Vivek Bhardwaj सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और देशभर से लगभग 700 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें महिला जनप्रतिनिधि, विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि तथा संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। यह सम्मेलन “सशक्त पंचायत–नेत्री अभियान” की शुरुआत के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया। इस मंच के माध्यम से पंचायत स्तर पर महिलाओं के नेतृत्व और उनकी उपलब्धियों को साझा करने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर महिलाओं की भागीदारी को और सशक्त बनाने पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा चयनित उत्कृष्ट “बीकन महिला पंचायत नेताओं” को सम्मानित किया गया। साथ ही मॉडल महिला अनुकूल ग्राम पंचायतों की श्रेष्ठ पहलों और ग्रामीण शासन में परिवर्तन की कहानियों पर आधारित एक संकलन भी जारी किया गया। इसके अतिरिक्त पंचायती राज मंत्रालय की “निर्भया” पहल से जुड़े प्रयासों को भी लॉन्च किया गया। सम्मेलन में दो तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए। पहला सत्र ग्रामीण शासन में महिला नेतृत्व और निर्णय-निर्माण की भूमिका पर केंद्रित था, जबकि दूसरा सत्र मॉडल महिला-अनुकूल ग्राम पंचायतों के विकास से जुड़ा रहा।
उद्घाटन सत्र में पंचायती राज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Sushil Kumar Lohani ने मुख्य वक्तव्य दिया। उन्होंने सम्मेलन की अवधारणा और पंचायतों में महिलाओं की बढ़ती नेतृत्व क्षमता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब महिलाएं पंचायतों का नेतृत्व करती हैं तो विकास की प्राथमिकताएं स्वाभाविक रूप से पानी, पोषण, स्वच्छता और शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर केंद्रित हो जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महिला नेतृत्व ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाता है, जिससे स्थानीय शासन अधिक समावेशी, भागीदारीपूर्ण और समुदाय की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील बनता है।
पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेखनीय है कि 4 मार्च 2025 को नई दिल्ली में पंचायती राज मंत्रालय ने “सशक्त पंचायत–नेत्री अभियान” की शुरुआत की थी। इस पहल का उद्देश्य पंचायत स्तर पर महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों की नेतृत्व क्षमता, निर्णय-निर्माण की शक्ति और शासन में उनकी भूमिका को मजबूत करना है।

पुनर्गठित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के तहत वर्ष 2025–26 में अब तक 7,18,434 महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं “Championing Change: Empowering Women Leaders in Local Governance and Beyond” नामक विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल के अंतर्गत 1,21,512 महिला प्रतिनिधियों और मास्टर ट्रेनरों को भी प्रशिक्षित किया गया है। इसके साथ ही 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 744 मॉडल महिला-अनुकूल ग्राम पंचायतों की पहचान की गई है। इन पंचायतों में शासन में महिलाओं की भागीदारी, स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा व कौशल विकास, आर्थिक अवसरों और सुरक्षा जैसे प्रमुख संकेतकों पर प्रगति को डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से ट्रैक किया जा रहा है।
यह सम्मेलन पंचायत स्तर पर महिलाओं के नेतृत्व को नई दिशा देने और ग्रामीण भारत में समावेशी विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।‘प्रधान पति’ प्रथा खत्म करने की पहल: ‘Say No To Proxy Sarpanch’ से पंचायतों में महिलाओं को मिलेगा असली अधिकार







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